संतुलन का मतलब यह नहीं है कि आपका दिन हमेशा एकदम सही (perfect) हो। इसका मतलब है कि आप काम, आराम और अपनी व्यक्तिगत ऊर्जा के बीच एक ऐसा तालमेल खोज लें, जो आपको बिना ज़्यादा थकावट के दिन गुज़ारने में मदद करे।
हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है जो लगातार 10 घंटे बिना रुके काम कर सके। काम करने (गतिविधि) और आराम करने (रिकवरी) के बीच का संतुलन समझना बहुत आवश्यक है।
जब हम लगातार काम करते हैं, तो ध्यान केंद्रित करने की क्षमता कम हो जाती है। इसे ठीक करने का आसान तरीका है 'माइक्रो-ब्रेक' (Micro-breaks)। हर एक-डेढ़ घंटे बाद 5 मिनट के लिए अपनी जगह से उठें। अपनी आँखें बंद करें, लंबी सांस लें या बस खिड़की से बाहर देखें। यह छोटा सा ठहराव शरीर और दिमाग को रीसेट करने का मौका देता है।
हर व्यक्ति की ऊर्जा का स्तर दिन के अलग-अलग समय पर अलग होता है। कुछ लोग सुबह बहुत तरोताजा महसूस करते हैं, जबकि कुछ दोपहर या शाम को बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। अपने इस प्राकृतिक लय (Natural Rhythm) को पहचानें।
दिन के सबसे कठिन या अधिक ध्यान मांगने वाले काम उस समय करें जब आपकी ऊर्जा सबसे अधिक हो। जब आप थकान महसूस कर रहे हों, तब हल्के काम (जैसे ईमेल चेक करना या फाइलें व्यवस्थित करना) करें। यह दृष्टिकोण अनावश्यक तनाव को कम करता है।
रोजमर्रा की स्थितियों में संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक दृष्टिकोण
ऑफिस या काम से वापस आने के बाद तुरंत घर के कामों में लगने के बजाय, 15 मिनट शांति से बैठें। कपड़े बदलें, हाथ-मुंह धोएं और सामान्य हो जाएं। यह छोटा सा "ट्रांजिशन टाइम" घर के माहौल को अधिक शांत बनाता है।
वीकेंड पर बहुत अधिक योजनाएं बनाने से वह भी काम के दिनों जैसा व्यस्त लगने लगता है। अपने सप्ताहांत में कम से कम आधा दिन बिना किसी पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम के खाली रखें, ताकि आप सच में आराम कर सकें।
खाना खाते समय टीवी देखना या फोन चलाना एक आम आदत बन गई है। दिन में कम से कम एक भोजन (जैसे डिनर) बिना किसी स्क्रीन के करें। इससे आप भोजन के स्वाद का आनंद ले पाते हैं और संतुष्टि का अनुभव होता है।
हर रविवार को 10 मिनट निकालकर सोचें कि पिछले सप्ताह क्या अच्छा रहा और कहाँ आपको बहुत अधिक थकान महसूस हुई। यह छोटी सी आदत आपको अगले सप्ताह की दिनचर्या को थोड़ा बेहतर तरीके से व्यवस्थित करने में मदद करेगी।